केवल कुछ बीघा जमीन पर मछली पालन करके लाखों कमा रहे Arnav Vats - जाने कैसे

 अर्णव वत्स बिहार के रोहतास जिले से बिलोंग करते है। रोहतास जिले को धान का कटोरा भी कहा जाता है। क्योंकि वहां पर अधिकतम धान की खेती होती है। अर्णव की शुरुआती वाराणसी से हुई है।  वैसे तो भारत में बिहार राज्य कई चीजों के लिए फेमस है। वहीं अगर बिहार प्रदेश को अगर फार्मिंग की दृष्टि से देखा जाए तो पूरे 60 % की भूमि पर बिहार में  फार्मिंग की जाती है।  अर्णव वत्स ने अपनी फिश फार्मिंग की जर्नी  को 3 से 4 साल पहले शुरू किया था।  अर्णव इससे पहले आईटी सेक्टर में काम कर चुके है।  अर्णव वत्स एक किसान परिवार से आते है। जहा इनके पिताजी आज भी पारम्परिक खेती करते है। अपने पिता को वह खेती करते देखते हुए बड़े हुए है।अर्णव वत्स द्वारा मछली पालन उधोग मे उतरने की ये ख़ास वजह हो सकती है। 

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जैसे ही अर्णव ने अपनी बीटेक की पढ़ाई कम्पलीट की वैसे ही उन्होंने जॉब करना स्टार्ट कर दिया। इसके बाद वो प्राइवेट सेक्टर में कई सालों तक जॉब करते रहे। इसके बाद वो जॉब की दुनिया को कुछ समय के लिए अलविदा कह कर अपने गांव वापस आये और गांव आकर  उन्होंने चावल की खेती शुरू की और इस काम को एक साल तक जारी रखा और इसके बाद वो नूज़ीलैण्ड गए जहा पर उन्होंने अपनी इंजिनयरिंग मे मास्टर डिग्री की और साथ ही उन्होंने पार्ट टाइम जॉब भी शुरू कर दी डेरी के फार्म्स मे।  इस दौरान उन्होंने ये अनुभव किया की कैसे वहां का एग्रीकल्चर इतना मजबूत है की वहाँ चीजें सस्ते में उपलब्ध हो जाती है। ऐसे में अर्णव जी ने सोचा की क्यों नहीं मे इन चीजों को मे बिहार मे कर सकता। 


अर्णव वत्स ने ऐसे में अपनी मछली पालन की जर्नी स्टार्ट कर दी।  जिसमे उन्होंने सबसे पहले तालाब का निर्माण कराया।  वह बताते है की रोहतास में पानी का प्रबंधन काफी अच्छा है।  जो की उनके मछली पालन के लिए एक बड़ा एडवांटेज साबित हुआ। पहले साल की मछली पालन की खेती में अर्णव को 40 परसेंट प्रॉफिट मिला। आज अर्णव वत्स 10 से 12 एकड़ की जमीं पर फिशरीस करते है। अर्णव वत्स की खासियत ये है की वो साल मे तीन बार मछलियों को हार्वेस्ट करते है।  अभी आने वाले समय में वह अपने इस प्राइमरी बिजनेस को और ग्रो कर रहे है और साथ ही लोगों को भी educate करते है  मछली पालन के बिजनेस के लिए। 


तो दोस्तों ये थी अर्णव वत्स की कहानी। आशा है की आप इनसे inspire हुए होंगे।  आपकी कहानी क्या है हमें लिख भेजिए matsypalan@gmail.com पर धन्यवाद।  



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